माँ दुर्गा का आगमन पालकी पर होगा ,हाथी पर विदाई, घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र मास में आने वाले नवरात्र को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और नौ दिनों तक उपवास तथा पूजा के माध्यम से देवी का स्मरण करते हैं। धार्मिक परंपराओं में यह समय साधना, भक्ति और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होंगे, हालांकि तिथियों के विशेष संयोग के कारण इस बार यह पर्व आठ दिनों का माना जाएगा।

इस बार माता रानी का आगमन डोली पर होगा, जबकि प्रस्थान गज (हाथी) पर माना जा रहा है। पं.अरविंद सहारिया ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि पालकी पर आगमन वर्ष की शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव का संकेत देता है, जबकि नवरात्र के अंत में मां दुर्गा का प्रस्थान गज (हाथी) पर होगा, जिसे समृद्धि, स्थिरता और सुख का प्रतीक माना जाता है।


घटस्थापना का शुभ मुहूर्त.....

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूजा देवी शक्ति के आह्वान का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय पूजा करना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है। यह मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

माँ  के नौ रूपों की होती है पूजा....

नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर वास करती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं।  इन दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं।  ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से इन नौ दिनों में माता की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।


नवरात्रि के 9 दिनों का विशेष भोग....

प्रथम दिन (माँ शैलपुत्री): गाय के घी का भोग लगाएं। इससे आरोग्य (स्वस्थ शरीर) की प्राप्ति होती है।

द्वितीय दिन (माँ ब्रह्मचारिणी): चीनी या मिश्री का भोग अर्पित करें। इससे आयु में वृद्धि होती है।

तृतीय दिन (माँ चंद्रघंटा): दूध या दूध से बनी मिठाई (जैसे खीर) का भोग लगाएं। इससे घर में सुख-शांति आती है।

चतुर्थ दिन (माँ कुष्मांडा): मालपुए का भोग अर्पित करें। इससे बुद्धि और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।

पंचम दिन (माँ स्कंदमाता): केले का भोग लगाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

षष्ठम दिन (माँ कात्यायनी): शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ है। इससे दुखों का नाश होता है।

सप्तम दिन (माँ कालरात्रि): गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं। इससे शत्रुओं और भय से मुक्ति मिलती है।

अष्टम दिन (माँ महागौरी): नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नवम दिन (माँ सिद्धिदात्री): हलवा-पूरी, खीर और काले चने का भोग लगाएं। इससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।


यदि विशेष भोग उपलब्ध न हो, तो आप अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोजन या फल का भोग भी लगा सकते हैं। 



                  पं. अरविंद सहारिया

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