क्या कांग्रेस का गेम बिगाड़ देगा बीजेपी का तीसरा कैंडिडेट

 आशीष रावत..... प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया  कभी पार्टी से निष्कासन को लेकर चर्चा में रहे महेश केवट अब भाजपा के भरोसे के साथ राज्यसभा की दौड़ में शामिल.....

मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है।  दो उम्मीदवारों के नाम घोषित करने के बाद पार्टी ने रविवार 7 जून को तीसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने इस तीसरी सीट पर कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ राज्य के मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार घोषित किया है।  इस घोषणा के साथ ही तीसरी सीट पर जीत के लिए दोनों दलों में मुकाबला होना सुनिश्चित है।  बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के नाम की घोषणा से पहले भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर पार्टी नेताओं ने एक बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।  पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसी बैठक में तीसरे उम्मीदवार के रूप में केवट को मैदान में उतारने की सहमति बनी, जिसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने इसे हरी झंडी दिखाई। 

बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार रात तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट के नाम की घोषणा की‌  इससे पहले शनिवार (6 जून) को बीजेपी प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था।  कांग्रेस की ओर से राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन सोमवार 8 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगी।  एक दिन पहले शनिवार को भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई थी, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने एकजुटता का दावा करते हुए नटराजन को जीत का दंभ भरा था। 

विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63  विधायक हैं। दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भाजपा के पास लगभग 48 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी। 

बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतारने के फैसले ने कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी है। बीजेपी का यह कदम बताता है कि पार्टी या तो अपनी पार्टी से बाहर के विधायकों का समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है या उसे लगता है कि क्रॉस-वोटिंग अंतिम नतीजे को बदल सकती है। 


Aashish kumar rawat 
Editor-in-Chief
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