शादी की दावत पड़ी भारी 100 से ज्यादा लोगों को लगे रेबीज के इंजेक्शन

छिंदवाड़ा के भैंसादंड गांव में बड़ी लापरवाह सामने आई है एक गाय को पागल कुत्ते ने काटा, लेकिन मालिक ने दूध निकालना जारी रखा वही दूध बारात में मट्ठे के रूप में परोस दिया गया अब तक 100 से ज्यादा लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लग चुके हैं....


छिंदवाड़ा के भैंसादंड गांव में कुत्ते के काटने से बीमार गाय के दूध से पहले मट्ठा बनाया गया।  इसके बाद इस मट्ठे को बारातियों को परोस दिया गया।  बाद में जब मामले का खुलासा हुआ, तो हड़कंप मच गया ।  स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर 100 से अधिक लोगों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग निगरानी भी कर रहा है। 


जानकारी के अनुसार, गाय को करीब एक सप्ताह पहले कुत्ते ने काटा था, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसके बावजूद पशु मालिकों ने दूध निकालना बंद नहीं किया और उसी दूध से मट्ठा तैयार कर बारात में मेहमानों को परोस दिया। मंगलवार को जब गाय की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ी, तब गांव में यह जानकारी फैल गई कि बारात में परोसा गया मट्ठा उसी गाय के दूध से बना था। खबर फैलते ही पूरे गांव में अफरातफरी मच गई। मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में विशेष शिविर लगाया। मट्ठा पीने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें एहतियातन रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अब तक 100 से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित लोगों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त वैक्सीन मंगवाई गई है, ताकि किसी को भी उपचार से वंचित न रहना पड़े।


घर-घर दी जा रही सूचना.....

बारात में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के कारण स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मदद से घर-घर जाकर लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उन्हें स्वास्थ्य केंद्र बुलाया जा रहा है। स्थानीय निवासी उमेश सोनी ने बताया कि सभी लोगों तक सूचना पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन लगातार प्रयास जारी हैं।


लापरवाही पर उठे सवाल....

बीमार पशु के दूध का उपयोग करना और उसे सार्वजनिक रूप से परोसना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा और जागरूकता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की अपील.....

स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि जिन लोगों ने मट्ठा का सेवन किया है, वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच और आवश्यक उपचार कराएं। साथ ही, पशुओं के काटने या बीमार होने की स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज कराने और उनके दूध का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता बढ़ गई है और लोग जागरूक नजर आ रहे हैं। यह घटना बताती है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है।

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