माँ विजयासन धाम सलकनपुर इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था के महासागर में डूबा हुआ है । चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। विंध्याचल पर्वत की ऊंचाई पर बसे इस शक्तिपीठ की ख्याति देशभर में फैली हुई है, जहां भक्त अपनी हर मनोकामना पूरी होने की आस लेकर आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां विजयासन देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं। कथा है कि राक्षस रक्तबीज का वध करने के बाद माता इसी स्थान पर विराजमान हुई थीं। यही स्थान आज विजयासन धाम के रूप में पूजित है। इसे 52वां सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है, जो इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।
यह पवित्र मंदिर करीब 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। पहले यहां पहुंचना कठिन था लेकिन अब सीढ़ियों, सड़क मार्ग और रोप वे की सुविधा से हर आयु वर्ग के लोग आसानी से दर्शन कर सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा राहत लेकर आई है। इस बार रोप वे की क्षमता बढ़ा दी गई है। अब एक केबिन में 12 की जगह 16 लोग सफर कर सकेंगे। इसके अलावा निजी वाहनों को भी मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है, हालांकि भीड़ बढ़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। जरूरत के अनुसार टैक्सियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी ।
स्वयंभू प्रतिमा, दिव्यता का अनोखा अनुभव.......
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माता की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, यानी यह प्राकृतिक रूप से निर्मित है। इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन मात्र से श्रद्धालु आत्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। परिसर में लक्ष्मी, सरस्वती और भैरव बाबा के मंदिर भी स्थित हैं, जो वातावरण को और अधिक पवित्र बनाते हैं।
नवरात्रि में होंगे 16 घंटे दर्शन.....
चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर के पट सुबह 5:30 बजे पहली आरती के साथ खुलेंगे और रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। यानी भक्तों को करीब साढ़े 16 घंटे तक लगातार दर्शन का अवसर मिलेगा। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। मंदिर समिति ट्रस्ट के अनुसार इस बार नवरात्र में पांच से दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यही कारण है कि प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ इस धाम की लोकप्रियता को और भी मजबूत बनाती है।


